बिंदियां चिपकीं हैं फ्रिज पर इन्हें रहने दो,

इनसे कुछ ख्याल जुड़े है इन्हें रहने दो,

ये टूटी खिड़कियां खटकतीं हैं तुम्हें,

यहां से पुरानी हवा बहती है इन्हें रहने दो,

उसने जैसे मेरे खातिर ही लगाए थे ये अमोले,

अब ये दरख़्त मुझसे बात करतें हैं इन्हें रहने दो,

कभी मिर्च के पकौड़े बना कर खाया करो जो,

तीखी सी महक रह जाए रसोई में, उन्हें रहने दो |

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